विजया गाथा....
Saturday, 12 March 2022
चंदेरी
Thursday, 18 February 2021
कांचीपुरम साड़ी
Saturday, 10 October 2020
जामदानी साड़ी
Saturday, 26 September 2020
जरदोजी....
उपकरण
पहले चर्खे का सहारा ताग को सीधा करने तथा उसे ठीक से प्रयोग की सहूलियत में उपयोग किया जाता था।पुरातन चर्खा लकड़ी एवम बांस की पट्टी से बना होता था,पर आजकल ये साईकिल के पिछले चक्के के प्रयोग से होता है, चेन, तथा गीयर को भी चरखा बनाकर उससे चरखे का काम लिया जाता है। इसके पिछे का कारण वस्तुतः साईकिल के रिम का मजबूत होना है जिससे यह ज्यादा दिन तक चलता है, वहीं दूसरा प्रमुख कारण है, इसका पहिया चेन तथा गीयर से लगा होता है अतः यह लकड़ी वाले चर्खा की तुलना में ज्यादा गतिशील हो जाता है जिससे कम समय में ज्यादा से ज्यादा ताग लपेटा जाता है।
बनाने की प्रक्रिया
इसमें मुख्यतः चार प्रमुख चरण शामिल हैं
1.आकृति को एक अनुरेखण पत्र या ट्रेसिंग शीट पर खींचा जाता है, और इन आकृतियों के अनुरूप ही उसे छिद्रित कर दिया जाता है।
2 .उस ट्रेसिंग शीट को कपड़े पर रखा जाता है, और वह आकृति नीचे स्थित कपड़े पर स्थानांतरित करने के लिए उस पर मिट्टी के तेल और रॉबिन ब्ल्यू के घोल को थपथपाया जाता है।
3. कपड़े को एक लकड़ी या बांस के खांचे में फँसा कर रखा जाता है और इसे अच्छी तरह फैलाया जाता है ताकि हर पंक्ति और आकृति स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
4. अंतिम चरण में ‘एरी’ नामक लकड़ी की छड़ी से जुड़ी सुई जो धागे को कपड़ों के ऊपर और नीचे से गुजर सकती है, की मदद से इस काम को किया जाता है।
काम में आवश्यक बारीकी के आधार पर, कारीगर एक कपड़े को निपटाने के लिए 1 से 10 दिन तक ले सकते हैं।
Saturday, 19 September 2020
रंग बनारसिया
Friday, 11 September 2020
घरचोला साड़ी
सन 2002,30 अप्रैल मेरी मुहबोली मौसी अपनी शादी में एक लाल साड़ी में बिल्कुल गुड़िया सी सजी धजी बैठी हुई।जाने ये उस माहौल का प्रभाव था या उस साड़ी का।साड़ी थी गुजरात की प्रसिद्ध घरचोला!