Saturday, 10 October 2020

जामदानी साड़ी


जामदानी सिल्क से बनी हुई साड़ियां पूरी दुनिया में अपनी कढ़ाई के काम, डिजायन और बारीक मलमल के कपड़े के लिए काफी प्रसिद्ध हैं।जामदानि, बंगाल के सबसे महीन मलमल वस्त्र है।गर्मियों के लिए एक अमूल्य उपहार धरा के बुनकरों द्वारा। बांग्लादेश के नारायणगंज जिले के दक्षिणी रूपसी में जामदानि का उत्पादन होता है,बांग्लादेश की राजधानी के नाम पर इसे ढाकाई जामदानी भी कहते हैं।भारत में बांग्लादेश से सटी सीमाओं में भी इसका निर्माण होता है।


जामदानी मुख्य तौर पर एक पर्शियन शब्द है,ये शब्द दो शब्दों जाम और दानी को मिलाकर बना है। जाम का मतलब है फूल और दानी का मतलब होत है गुलदस्ता। 


इस साड़ी इतिहास इतना पुराना है कि इसका जिक्र ईसा पूर्व के चाणक्य के द्वारा लिखे ग्रंथ अर्थशास्त्र में मिलता है।अरब भूगोलशास्त्री Sulaiman Al Mahri ने भी अपनी किताब ‘Sril Silat-ut-Tawarikh’ में भी जामदानी का ज़िक्र किया है।

अवध के नवाबों के शासन काल में जामदानी ने कलात्मक श्रेष्ठता प्राप्त कर ली थी। जामदानी के उद्भव के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन गुप्तकाल (चौथी से छटी शताब्दी ई.) के संस्कृत साहित्य में इसका उल्लेख है। यह तो ज्ञात है कि मुग़ल काल (1556-1707 ई.) में श्रेष्ठ जामदानियां ढाका, तत्कालीन बंगाल राज्य में वर्तमान बांग्लादेश की राजधानी, में बनाई जाती थी

पारंपरिक तौर पर  इसका निर्माण सिर्फ  पुरुषों द्वारा की जाती है।
हालांकि इंडस्ट्री रेवोल्यूशन के चलते औरतों ने भी इसे बनाना शुरू कर दिया है। जामदानी की पारंपरिक बुनाई अभी भी पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में की जाती है और बांग्लादेश के रूपगंज, सोनारगांव और सिद्धिरगांव में भी जामदानी की बुनाई होती है।

जामदानि को बुनने की कला को यूनेस्को ने 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' घोषित किया है।